महराजगंज ( Uptv ): महाठग एसके मोटर्स के ठगी की जाँच पुलिस के उच्चाधिकारियों द्वारा अभी जारी है और इसी बीच एक खबर ने माहौल गरमा दिया है.
एसके मोटर्स के प्रोपराइटर कुलवंत सिंह व परमजीत सिंह के साथ दिखने वाले लड़के (प्रभजोत सिंह) के कारनामों के बारे में दर्शकों को हमनें खूब बताया कि कैसे नवासिखिये प्रभजोत सिंह ने पिता की बनी बनाई एम्पायर में ठगी करके चार चांद लगाया और कैसे इसे नेस्तनाबूत करता जा रहा है.
बजाज की दोपहिया वाहनों की एजेंसी के मालिकों ने ग्राहकों से ठगी की जिसका शिकायत जिले के अधिकारियों सहित मुख्यमंत्री दरबार में शिकायतकर्ताओं ने की हुई है, जिले के तेज तर्रार अपर पुलिस अधीक्षक मामले की गहनता से जांच कर रहे हैं.
पिछली खबर में हमनें आपको बताया था कि कैसे इन मुख्य एजेंसी संचालकों ने छोटे सब डीलरों को एक एक कर बर्बाद कर दिया और उन्हें सड़क पर छोड़ दिया. अब जिले में मुख्य रूप से 2 एजेंसी (सब डीलर) ही बचे हुए थे परतावल और घुघुली.
घुघुली के सब डीलर के प्रोपराइटर चंदन कुमार के बारे में हमारी टीम ने पुख्ता जानकारी हासिल किया है कि उन्हें सरदार बन्धुओ ने निगल लिया यानी कि उनका एजेंसी उनसे किसी कारणों से छीन लिया गया है. अब घुघुली में एसके बजाज की एजेंसी खोली जा सकती है. और अब इसके बाद समाजवादी पार्टी के एक रसूखदार नेता के सगे भाई नासिर हुसैन की एजेंसी की बारी है. आशंका जताई जा रही है कि परतावल वाली एजेंसी बंद कराकर नासिर जी को सड़क पर खड़ा कर दिया जाएगा.
इसके बाद सरदार बन्धुओ का इल्म क्षत्र – राज रहेगा, जैसे एसके मोटर्स की अन्य एजेंसियों पर लूट मचाई जा रही है ठीक उसी प्रकार से जिले के कोने कोने में सरदार बन्धु अपनी शाखा डालकर खुलेआम लूट मचाएंगे.
घुघुली के सब डीलर रहे चंदन कुमार से हमारी टीम ने संपर्क करने का प्रयास किया वह घुघुली में नहीं मिलें! उनसे फोन पर भी संपर्क करने का प्रयास किया जा रहा है जिससे कि महा ठगों के इस मायाजाल की तार को तोड़ा जा सके.
सूत्र यह भी बताते हैं कि मुख्य एजेंसी पर तैनात संजीव श्रीवास्तव नामक एक कर्मचारी नए नए लोगों को फांस कर सरदार बन्धुओ के करीब लाता था और उन्हें एजेंसी (सब डीलरशीप) दिलाने के नाम पर उनसे मोटी रकम जमा कराता था और उन्हें बड़ा बड़ा ख्वाब बेचकर उन्हें भंगी बना देता था कुछ ऐसा ही मिठौरा, बहुआर और अब घुघुली के संचालकों के साथ हुआ.
अब देखना होगा साइबर सेल की जांच, अपर पुलिस अधीक्षक की जाँच और शिकायतकर्ताओं की साक्ष्यों में कितना दम है?
