कारगिल विजय दिवस: लखनऊ की यादों में आज भी ताजा है 23 साल पहले की शहादत
ऐ मेरी जमीं महबूब मेरी, मेरी नस-नस में तेरा इश्क बहे, फीका न पड़े कभी रंग तेरा जिस्मों से निकल के खून कहे… कुछ इसी जज्बे के साथ जवानों ने…
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ऐ मेरी जमीं महबूब मेरी, मेरी नस-नस में तेरा इश्क बहे, फीका न पड़े कभी रंग तेरा जिस्मों से निकल के खून कहे… कुछ इसी जज्बे के साथ जवानों ने…