Report: Uptv Desk
By: Arun Kumar
:- घने जंगलों में स्थित है प्राचीन शिव मंदिर
:- सावन और महाशिवरात्रि पर लगता है आस्था का मेला
:- नेपाल से लेकर बिहार तक के श्रद्धालु करते हैं दर्शन
मंदिर, जलाभिषेक, पूजा-पाठ, भक्तों की भीड़
उत्तर प्रदेश के महराजगंज जनपद में स्थित कटहरा शिव मंदिर ना सिर्फ एक धार्मिक स्थल है, बल्कि इतिहास और आस्था का भी केंद्र है। बौद्धकाल से जुड़ा यह मंदिर आज भी अपनी परंपरा और चमत्कारों के लिए चर्चित है।
मंदिर के पुराने हिस्से, घना जंगल
प्राकृतिक सौंदर्य और घने जंगलों के बीच बसे इस मंदिर को बुद्धकालीन माना जाता है। जनश्रुति है कि गौतम बुद्ध की माता रानी गौतमी जब गर्भवती थीं, तो लुंबिनी जाते वक्त इसी रास्ते से होकर निकली थीं।
पुरानी पगडंडी, ग्रामीण जीवन
कहते हैं कभी ये क्षेत्र घने जंगलों से घिरा था और लोग यहां बसने से डरते थे। तत्कालीन जमींदार अफजल खान ने मुनादी करवा कर लोगों को बसने के लिए प्रोत्साहित किया।
प्राचीन कुआं, सुरंग स्थल, एनीमेशन/फोटो ग्राफिक्स
मंदिर से लगभग 800 मीटर दूर एक प्राचीन कुएं और सुरंग का भी उल्लेख मिलता है। मान्यता है कि इसी सुरंग से राजा भोलेनाथ के दर्शन के लिए मंदिर आते थे।
चोरी करने गए चोरो के आंखों पर छाया अँधेरा, चोरो को बेहोशी के हालात में पुजारी ने पकड़ा
करीब तीन सौ साल पहले, कुछ चोर मंदिर से अष्टधातु और घंटा चुराने घुसे, लेकिन अंधेरी रात में उन्हें सर्प और जहरीले जीवों ने घेर लिया। सुबह होने पर पुजारी ने उन्हें बेहोशी की हालत में पाया। चोरों को राजा के सामने पेश किया गया, माफी मांगने पर उन्हें छोड़ दिया गया।
पोखरे, ग्रामीण महिलाएं, स्नान
मंदिर के उत्तर दिशा में आज भी तीन विशाल पोखरे मौजूद हैं। मान्यता है कि यहां कभी रानियां स्नान करने आती थीं।
लोगो की मान्यताएं होती पूर्ण
“जो भी सच्चे मन से भोलेनाथ की पूजा करता है, उसकी हर मुराद पूरी होती है। सावन में यहां भक्तों का तांता लगता है।”
श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए धर्मशाला का हुआ निर्माण
मंदिर परिसर में धर्मशाला का निर्माण भी कराया गया है। सावन भर यहां गोरखपुर, देवरिया, बिहार और नेपाल तक से श्रद्धालु जलाभिषेक के लिए आते हैं। महाशिवरात्रि पर विशाल मेले का आयोजन होता है।
